श्योपुर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत संचालित स्वसहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक बदलाव का माध्यम बन रहे हैं। इनके माध्यम से महिलाएं अपने आर्थिक उत्थान की इबारत लिख रही है और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन रही है। जनजातीय महिलाओं के शून्य से शिखर की ओर बढने की यह तीन कहानियां हमें संदेश देती है कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर कैसे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।

कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत श्री कार्तिकेय जायसवाल के निर्देशन में श्योपुर जिले में एनआरएलएम अंतर्गत 5 हजार 816 स्वसहायता समूह संचालित है, जिनसे लगभग 58 हजार महिलाएं जुडी हुई है, जिनमें से 19 हजार महिलाएं ऐसी है, जो आजीविकामूलक गतिविधियों को अपनाकर लखपति दीदी क्लब में शामिल हो गई है।

खास बातें

  • गत शनिवार को कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा द्वारा भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रही इन महिलाओं से गांव में जाकर भेंट की गई और उनकी रोजगारमूलक गतिविधियों का अवलोकन किया गया।
  • एनआरएलएम के नोडल अधिकारी श्री गोपाल शर्मा ने बताया कि 10 स्वसहायता समूहों को एक-एक लाख रूपये की सीसीएल राशि स्वरोजगार स्थापना के लिए प्रदाय की गई है।
  • आज वे एक सीजन में एक लाख रूपये तक आमदनी प्राप्त कर रही है।

इस वित्तीय वर्ष में शासन की योजना के तहत अभी तक समूहों को 36 करोड रूपये की सीसीएल राशि प्रदाय की गई है, जिसके माध्यम से महिलाएं रोजगार मूलक गतिविधियों का संचालन कर परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। गत शनिवार को कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा द्वारा भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रही इन महिलाओं से गांव में जाकर भेंट की गई और उनकी रोजगारमूलक गतिविधियों का अवलोकन किया गया।

एनआरएलएम के नोडल अधिकारी श्री गोपाल शर्मा ने बताया कि 10 स्वसहायता समूहों को एक-एक लाख रूपये की सीसीएल राशि स्वरोजगार स्थापना के लिए प्रदाय की गई है।

कमली पटेलिया जिन्होंने परिवार को दिया आर्थिक संबल

आदिवासी विकासखण्ड कराहल के सुदूरवर्ती ग्राम करियादेह की निवासी श्रीमती कमली पटेलिया एक आम गृहणी है, लेकिन वैष्णो देवी समूह से जुडकर उन्होंने अपने कौशल को निखारा और रोजगार-व्यवसाय के गुणों को सीखा, समूह के माध्यम से बचत और पंूजी को व्यवसाय में लगाने का हुनर भी सीखा। उन्होंने अपने समूह से 90 हजार रूपये की ऋण राशि ली और गांव में डीजे साउंड सर्विस की शुरूआत की।

आज वे एक सीजन में एक लाख रूपये तक आमदनी प्राप्त कर रही है। श्रीमती कमली पटेलिया कहती है कि पहले ट्रेक्टर के माध्यम से डीजे का संचालन किया, बाद में जब आमदनी हुई तो पिकअप वाहन खरीदा और उस पर डीजे फिट करा लिया। उनके पति श्री देवेन्द्र पटेलिया डीजे गाडी को चलाते है। इस प्रकार श्रीमती कमली पटेलिया ने घर-गृहस्थी संभालते हुए अपने पति को भी रोजगार से जोडने का कार्य किया।

काली पटेलिया- जिन्होंने अपने पति के लिए खुलवाया हेयर सेलून

ग्राम करियादेह की ही एक ओर महिला श्रीमती काली पटेलिया है, जो सिंहबाबा स्वसहायता समूह से जुडी हुई है। उन्होंने अपने समूह से 10 हजार रूपये का लोन लेकर पति श्री दिनेश पटेलिया के लिए गांव में ही हेयर सेलून खुलवाया। जिसके माध्यम से उनके परिवार को नियमित आमदनी प्राप्त हो रही है और पति को गांव में रोजगार की उपलब्धता हुई है।

झूमली पटेलिया- आटा चक्की से आत्मनिर्भरता की ओर

श्रीमती झूमली पटेलिया, यह भी ग्राम करियादेह की निवासी है समूह से जुडने से पूर्व खेतीबाडी का कार्य करती थी, बाद में स्वसहायता समूह सिद्धबाबा की सदस्य बनी और बचत करते हुए समूह की बैठको तथा एनआरएलएम द्वारा आयोजित क्षमतावर्धन प्रशिक्षण से व्यवसाय के गुण सीखे, इसके उपरांत उन्होंने 90 हजार रूपये का लोन समूह से लिया, जिससे उन्होंने अपने घर पर ही आटा चक्की की स्थापना की तथा स्वयं के द्वारा आटा चक्की का संचालन किया जा रहा है।

इस प्रकार जनजातीय महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय कर न केवल आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त हो रही है, बल्कि अपने परिवारों की आर्थिक उन्नती का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।