लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम लकोड़ा में स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ग्राम में 150 किलोलीटर क्षमता की उच्च स्तरीय टंकी तथा 20 किलोलीटर क्षमता के सम्पवेल का निर्माण किया गया है। लगभग 2584 की आबादी वाले ग्राम लकोड़ा में 538 परिवार निवास करते हैं और जल जीवन मिशन के माध्यम से सभी 538 परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। ग्राम को ‘हर घर जल’ प्रमाणित भी किया गया है।
जल जीवन मिशन से पहले ग्राम लकोड़ा में पेयजल संकट लंबे समय से बना हुआ था। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए मुख्य रूप से कुओं और हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के मौसम में जल स्रोत सूख जाने के कारण ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था। पानी की व्यवस्था में महिलाओं और बच्चों का काफी समय व्यतीत होता था, जिसका सीधा असर उनके दैनिक जीवन और अन्य गतिविधियों पर पड़ता था।
अब घर-घर नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचने से ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पानी के लिए दूर जाने की जरूरत खत्म होने से महिलाओं का समय बचा है। इस समय का उपयोग वे सिलाई, पशुपालन और छोटे-छोटे व्यवसायों में कर रही हैं। इससे परिवार की आय बढ़ाने के अवसर भी मिले हैं। कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर सामुदायिक एवं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।
ग्राम की पेयजल समिति की सक्रियता से योजना के संचालन एवं क्रियान्वयन को भी सुचारू बनाए रखने में मदद मिल रही है।
महिलाओं ने कहा—घर में नल लगना सम्मान और राहत का एहसास
ग्राम की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब जल जीवन मिशन के तहत उनके घरों में नल कनेक्शन लगा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि घर में नल लगना उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। अब नल खुलते ही स्वच्छ और ठंडा पानी घर पर ही उपलब्ध हो जाता है।
महिलाओं ने कहा कि “घर पर नल लगना हमारे लिए सम्मान और राहत का समय है। हमारे लिए यह पानी अमृत से कम नहीं है।”
आज ग्राम लकोड़ा के परिवार पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। पेयजल की समस्या दूर होने से दैनिक जीवन आसान हुआ है और महिलाओं को अपने समय का उपयोग आजीविका एवं स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में करने का अवसर मिला है।
ग्राम लकोड़ा की यह कहानी बताती है कि जल जीवन मिशन केवल घरों तक पानी पहुंचाने की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुविधा, सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक अवसरों का आधार बन रहा है।

